Monday, 29 November 2010

अगर आप स्कूली शिक्षा में तीन चीज़ें ही बदल सकते, तो वे क्या होतीं?

पिछले दो दशकों से शिक्षा में सुधार पर काम करते-करते अब हमारे पास इतने ज्यादा विचार / सुझाव हो गए हैं कि समझ ही नहीं आता कि इस गुत्थी के छोर किस ओर है! इसीलिए आप से पूछ रहा हूँ कि आप अगर तीन चीज़ें ही बदल सकते, तो वे क्या होतीं? अगर कई लोगों को कुछ बदलाव ज़रूरी या शुरुआत के लिए अच्छे लगते हैं, तो हो सकता है कि हमें दिशा मिले.

अतः, आप के सुझाव आमंत्रित हैं, कृपया इस मामले में कंजूसी ना दिखायें, जल्द ही सोचें और लिखें. [आप अंग्रेजी लिपि में हिंदी लिख सकते हैं, कमेंट्स के लिए विचार चाहिए, अंग्रेजी नहीं!]

3 comments:

  1. Namste,
    Aam aadmi ke liye shiksha aajivika ke liye hi ho kar rah gyi hai.Itna sara gadbad aur itni saari gandgi samajme aur shiksha bhi jyada ! Yeh to ashikshit shiksha hui ! Shiksha me jivan jine ke mulya ko mahatva dena ati aavashyak hai.Jamini hakikato ko rubru karane ke liye,yog,meditation,aur shukshma insani structure ki shiksha hi aaj pheile huai vaicharik pradushan ko mita sakti hai.Aavashyak ta hone par mere ek ek labj ko mai vigyanke taur par samja sakta hu.

    aapka aur mera shubh chintak....

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  2. respected sir,
    i like your new ideas about education.it will change our future. ERAC model and whole process of syllabus making.we can see edu.in different view.This will our new eye to see our classroom.we can understand education very well with your help.

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  3. १- शैक्षिक परिदृश्य से प्रशासन को खत्म कर दीजिए|
    २- प्राथमिक शिक्षा को केंद्रीकृत करने के बजाय विकेन्द्रीकृत किया ......विद्यालय स्तर पर नाकि पंचायत स्तर पर
    ३- कुशक अध्यापक के लिए हमारे शैक्षिक प्रशासनिक माहौल में क्या है.....अब शायद इस पर भी सोचा जाए|

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