Sunday, 10 April 2011

प्रधान अध्यापक - क्या करे, क्या न करे?

आपकी नज़र में, वे कौन से तीन चीज़ें हैं जो प्रधान अध्यापकों को बिलकुल नहीं करनी चाहिए? और कौन सी तीन सच में करनी ही चाहिए? 

आपके जवाबों का इंतज़ार है. नीचे के कमेंट्स सेक्शन में लिखें.

(जैसा की आप समझ ही गए होंगे, प्रधान अध्यापकों के लिए प्रक्षिक्षण बनाया जा रहा है - आपके योगदान और भूमिका की सराहना की जाएगी!)

7 comments:

  1. Dose---
    1. Teaching ke time par bachhon se najaren milti rahe.
    2. Her bachhe ki bat ko sune.
    3. Kamjot bachhe par jyada dhyan de.
    Don't---
    1.Bachhon ke samne simple chamak-dhamak wale kapde main na jayen.
    2.Bachhon se gusse se bat na karen.
    3.School par deri se na pahuchen.

    ReplyDelete
  2. Thank you Abhay! Good suggestions.

    ReplyDelete
  3. Hamne Hd Teacher se bat ki.Unka kahna tha-Din bhar kaise khud charge rhe aur sathiyo ko charge rkhe?School me Anushasan banye jabki Bachchon ko datna nhin hai? Bachchon ke Avivakon ko kaise santist karen?

    Bachon ki kshamta ya takton ka estemal se kisi bhi school me jaruri manav sanshadhan milte hian.Aur school me jabardast Jiwantta aa jati hai,eaisa anek bar karke dekha gya hai,eske liye Bachchon per vishwas hona bahut jaruri hai.

    ReplyDelete
  4. Achhe bindu hain, yahan HT ke liye prashikshan ban raha hai, and kal hi mai in baaton ko saathiyon ke samne rakhunga. Dhanyavaad!

    ReplyDelete
  5. Dose...
    1-kuchh naya karne ki ichchha rakhe
    2-Sathi shikshak mai kuchha possitive dekhe
    3-khusha rahe
    4-Apni baat kahne me hicha kichat na ho

    Don't
    1-Gussa na kare
    2-School ko manufacturing unit na samje
    3-naye vicharo ko apnane mai hich kichahat
    4-Apna kam dusaro se karvana.

    ReplyDelete
  6. क्या करे
    1- शिक्षा के सरोकार/उद्देश्य को समझे
    2- अपने काम और स्कूल के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुये कम से कम पाँच वर्ष के लिए गोल बनाए।
    3- पाँच वर्ष के लिए तय किए गए गोल को पाने के लिए अपने स्कूल की वार्षिक शैक्षिक योजना बनाए जिसमें शैक्षिक गतिविधियां और प्रक्रीया को शामिल करे।
    क्या नहीं करे .............
    1- किताबों को पूरा करने की जल्दबाज़ी न तो खुद करे न सहयोगी शिक्षकों को ऐसा करने के लिए दबाब बनाए।
    2- खुद को केवल प्रबंधन का हिस्सा न माने बल्कि अकादमिक काम में सहयोगी शिक्षकों के साथ खुद को शामिल करे।
    3- अकादमिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों खुद तक ही सीमित न रखे बल्कि सहयोगी शिक्षकों के बीच विश्वास के साथ इन्हे विकेंद्रीत करे।

    धन्यवाद

    ReplyDelete