Friday, 26 January 2018

जब नीलगाय से मिली मदद

आपको पता तो होता है कि ये कथन आने वाला है, लेकिन हर बार एक झटका जरूर लगता है।

"अब गरीब बच्चे हैं, दिमाग से कमजोर होते हैं, ज्यादा कुछ सीख नहीं पाते..."

इस पर मुझसे रहा नहीं गया। "गुरूजी, आप तो ऐसी बात कर रहे हैं जैसे कि कोई अस्पताल कह रहा हो, भई स्वस्थ लोगों को ही भेजो, रोगियों को नहीं! आप उस से क्यों नहीं शुरू करते जो आप के बच्चे जानते हैं?"

"क्या जानेंगे ये बच्चे जी? जंगल में ही रहते हैं, कुछ बता नहीं पाते."

"अच्छा ये बताइये कि नीलगाय और गाय में क्या फरक है?"

गुरजी सकपकाये. "और बिना नीचे देखे ये भी बताइये कि आपके पांव के आस-पास कौन-कौन सी पत्तियां पड़ी हैं."

फिर अंदाज़ लगाइये कि किस दिशा में बात हुई.




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